खाया पीया कुछ भी लगता नहीं है शरीर पर ,सेहत नहीं बनती और वजन नहीं बढ़ता । क्या है इसका कारण और क्या है इसका सही उपचार ?

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अगर आप पतले दुबले कमजोर हैं आपको खाया पीया कुछ भी लगता नहीं है शरीर पर , खाना खाते ही शौचालय जाना पड़ता है ,आप हर तरह के इलाज और उपाय करके हो चुके हैं परेशान । जब तक आप कुछ दवाओं का सेवन करते हो तभी तक आपकी सेहत बनती है । दवाएँ बंद करते ही आप फिर दुबारा पतले हो जाते हो । अच्छी सेहत ना होने के कारण आप में आत्मविश्वास की भी कमी रहती है । जितना भी ज्यादा से जयादा खा लें आपकी सेहत नहीं बनती या तो पाँचन कमजोर रहता है या भूख बहुत ज्यादा लगती है । पेट भी अच्छे से साफ़ नहीं होता । आपके गाल और चेहरा पिचके हुए और कमजोर दिखाई देते हैं । 

वजन ना बड़ने और खाया हुआ शरीर पर ना लगने के अनेक कारण हो सकते हैं और कुछ लंबे समय से चली आपको गंभीर बीमारी भी हो सकती है जैसे क्षय रोग (Tuberculosis) या Ulcerative Colitis की समस्या या सालों साल से White Discharge (लिंग से सफ़ेद और चिपचिपा पानी आना) और स्वप्न दोष (Night Fall) की समस्या या लिवर (Liver) अथवा पाचन तंत्र (Digestive System) की कमजोरी या आपको Diabetes या शुगर (Sugar) होना या कब्ज (Constipation) यानी पेट अच्छे से साफ ना होना या IBS अथवा Diarrhea की समस्या और इनके कारण आपका वजन एक दम से काफी कम हो जाना या बचपन से ही खूब खाने के बावजूद आपकी सेहत ना बनना । तो इस लेख को अंत तक अवश्य पड़ें और आज ही हमसे परामर्श लें । 



अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जिन भी रोगियों को खाया पिया कुछ भी लगता नहीं है शरीर पर उनके 2-3 मुख्य कारण होते हैं उस्मे सबसे पहला है हमारे खाने का पाचन बहुत ज्यादा होना , हमारी भूख बहुत ज्यादा होना, ऐसी परिस्तिथि वाले लोगों को बहुत ज्यादा भूख लगती है , वह खाने में भले ही 10 रोटियाँ भी खां लें पर उनको खाया हुआ कुछ लगता नहीं है शरीर पर । वह हर 2-3 घंटे में भी कुछ ना कुछ खाते ही रहते हैं और आयुर्वेद में इसे “तीक्ष्ण अग्नि” या “भस्मक रोग” कहते हैं यानी उनका पाचन और उनके खाने को पचाने वाले अग्नि इतनी जयादा होती है , उनका Metabolism इतना ज्यादा होता है कि उनका खाना पचता नहीं है जल जाता है । 



इसे एक छोटे से उदाहरण से समझते हैं कि अगर आप कभी तवे पे रोटी पकाते हैं तो रोटी को पकाने के लिए चूल्हे की जो आग होती है अगर वो बहुत कमजोर हो तब रोटी सही से नहीं पकती और अगर वह आग बहुत तेज हो तब भी वह रोटी सही से नहीं पकती क्योंकि वह जल जाती है इसलिए यह दोनों ही ठीक नहीं है और चूल्हे की आग एक दम सामान्य (Normal) होनी चाहिये , ना ज्यादा कमजोर ना ज्यादा तेज , तभी आपकी रोटी या आपका भोजन सही से पकेगा। आयुर्वेद के अनुसार ऐसी ही एक अग्नि , भोजन को पचाने वाली हमारे पेट में भी होती है जिसे की आयुर्वेद में जठर अग्नि या जठराग्नि कहते हैं । अगर इसकी तुलना चूल्हे की अग्नि से  किया जाये तो अगर हमारे पेट की यह अग्नि कमजोर होगी यानी पाचन कमजोर होगा ,Metabolism कम होगा तो भी आपका खाना सही से हजम नहीं होगा और आपको खाया पिया कुछ नहीं लगेगा और अगर यह पेट की अग्नि बहुत तेज , तीक्ष्ण और तीव्र होगी यानी पाचन और Metabolism बहुत तेज होगा तब भी आपको खाया हुआ लगेगा नहीं शरीर पर और वह जल जाएगा । 

इसलिए अमूमन जिनको भी खाया पीया लगता नहीं है शरीर पर उनके मल (Stool) में काफ़ी पीलापन देखा जाता है , और यह पीलापन शरीर के पित्त को दर्शाता है यानी आपका Digestive Juice आपका Bile आपका पित्त बहुत ज्यादा है आपकी पाचक अग्नि बहुत तेज है । इसलिए दस्त (Loosemotion) होने पर भी आपको पीला पानी जैसा पित्त नजर आता है । खाया पीया ना लगना यह मुख्यतः शरीर में पित्त और वायु की विकृति का रोग है । और ऐसे लोगों के शरीर में मल में पीलापन के साथ साथ शरीर में जगह जगह काले तिल होना , ग़ुस्सा बहुत आना , बहुत बातूनी स्वभाव या ज्यादा भाग दौड़ करना ऐसे लक्षण देखें जाते हैं । 



दूसरा मुख्य कारण है क़ब्जियत (Constipation) यानी पेट का अच्छे से साफ़ ना होने ,और पेट अच्छे से साफ़ ना होने का वजन कम होने से या खाया पीया ना लगने से क्या संबंध है इसे समझने के लिए इस Blog के अंत में एक लिंक जोडा गया है जिसे आप पड सकते हैं जिसका नाम है “क्या है कब्ज? क्यूँ होती हैं हमे क़ब्जियत ?”



तीसरा कारण है शरीर में कोई अन्य रोग होना जिससे की शरीर की धातुएँ सूख जाना जैसे गुप्त रोग (Sexual Problems) White Discharge ( लिंग से सफ़ेद और चिपचिपा पानी आना) , स्वप्नदोष (Nightfall) की समस्या , क्षय रोग (Tuberculosis) या Ulcerative Colitis की समस्या या आपको Diabetes या शुगर (Sugar) होना या IBS अथवा Diarrhea की समस्या होना या मानसिक रोग जैसे Anxiety , Depression तनाव या श्वास रोग होना  ।

हमसे परामर्श लेने वाले 99 % लोगों का यही कहना होता है कि हमने इतनी जगह से दवाई खाई इतना पैसा खर्च किया इतना समय का कोर्स किया पर हमारी यह समस्यायें ठीक ही नहीं हुई। उसका कारण यह है की आज कल के जो वैद्य और डॉक्टर हैं वह रोगी को ठीक करने के मक्सत से नहीं बल्कि अपनी औषधि बेचने के मकसत से इलाज करते हैं। कुछ बनी बनाई औषधियाँ तैयार करके रख लेना और हर व्यक्ति को अपनी दवा बेच के अपना कोर्स पूर्ण कराना और उसके बाद कोई परिणाम ना मिलने पर वह रोगी निराश हो जाता है और किसी भी तरह के उपचार को कराने से हिचकिचाता है ।


आप खुद ही सोचिए क्या इस दुनिया में हर व्यक्ति एक जैसा है? जवाब है नहीं । हर व्यक्ति इस दुनिया में अलग है उसके शरीर की बनावट अलग है वह किस जल वायु में रहता है उसकी जीवनशैली भी अलग है और उसके शरीर में बीमारी होने के कारण भी अलग अलग है ,किसी व्यक्ति को गरम खान पान और औषधियों से उसकी समस्या बड जाती है उसके शरीर की गर्मी बड जाती है और किसी को ठंडी से तकलीफ होती है । तो हर व्यक्ति को एक ही दवा कैसे काम कर सकती है। अगर एक ही दवा सबके लिए काम करती तो इस दुनिया में डॉक्टर्स की आवश्यकता ही ना होती ।


एक और महत्वपूर्ण बात जो लोगों को समझ में नहीं आता वो यह कि हमे बीमारी के कारण को बंद करना अत्यंत आवश्यक है । इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं । सोचिए आप अपने घर से बाहर निकले और आपसे गलती से आपके घर के पानी का जो नलका है वह खुला रह गया । जब आप घर वापिस आए तो आपने देखा कि पूरे घर में पानी भर चुका है और पानी का नलका भी चल रहा है । कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति इस परिस्थिति को देख कर सबसे पहले क्या करेगा । क्या वह पोचा और viper लेके पानी निकालना शुरू कर देगा या पहले पानी के नलके को बंद करेगा जिससे और पानी ना जमा हो । तो आप कहेंगे कि पहले पानी के नलके को ही बंद करेगा वरना जितना भी हम मेहनत करेंगे जितना मर्ज़ी पोछा मार लेंगे पानी कुछ समय बाद फिर दुबारा भर जाएगा । तो यह बुद्धिमत्ता आपकी तब कहाँ जाती है जब आपके शरीर की बात आती है । क्योंकि यह जो पानी का चलता हुआ नलका है यह आपके बीमारी का कारण है यानी आपका गलत ख़ान पान और जो पोछा है वह है आपकी औषधि । अब आप दुनिया का महँगा से महँगा पोछा खरीद लीजिए बड़ी से बड़ी Technology ले आइए पर आपको कोई लाभ नहीं होगा और आपकी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी यानी कहने का अभिप्राय यह है कि आप बड़े से बड़े Doctor और Hospital से इलाज करा लीजिए , महँगी से महँगी दवा खा लीजिए , आपकी समस्या ठीक ही नहीं होगी क्योंकि आप पानी का नल्का नहीं बंद करना चाहते । हो सकता है कुछ समय के लिए किसी औषधि से आराम हो जाये पर यह समस्या फिर दुबारा हो जाएगी यानी थोड़े समय बाद पानी फिर दुबारा भर जाएगा क्योंकि आपने पानी का नल्का यानी बीमारी का कारण ही नहीं बंद किया । यह उदाहरण उन लोगों के  लिए भी है जो कहते हैं कि जी हम ख़ान पान नहीं बदल सकते , सिर्फ़ दवाई देदो उसी से ठीक हो जायें। तो हमारी सलाह यही रहेगी कि आप अन्य जगाओ पे अपनी मेहनत का पैसा बर्बाद करने की तरह यहाँ ना करें । या तो आप अपने शरीर और अपने रोग को ऐसे ही स्वीकार कर लें या कुछ नये नये दवाई और औषधियाँ Try करते रहे क्योंकि परिणाम कुछ नहीं मिलना और हमे भी लोगों को लूटने और व्यापार करने की इच्छा नहीं हैं । हमारा उद्देश्य है उस व्यक्ति की बीमारी को जड़ से ख़त्म करना और उसे लाभ देना ना की अपनी दवा बेचना ।


इसलिए हीलिंग रूट्स (Healin Roots) पर हम पूर्णतः पारंपरिक और शास्त्रोक्त पद्धति से चिकित्सा करते हैं जिसमे हम पहले आपसे एक ऑनलाइन पंजीकरण पत्र (Online Registration Form) भरवा के आपके बीमारी के कारण को समझते हैं ,इस पंजीकरण पत्र में आपके शरीर और आपकी जीवनशैली से जुड़ी कुछ जानकारी माँगी गई होती है और फिर आपके पत्र के आधार पर आपकी बीमारी के कारण और आपके शरीर की प्रकृति को देख कर अलग से औषधि बनाई जाती है जिसमे एक दिन का समय लगता है और तीन चार दिन में आपके घर पूरे भारत में औषधि भिजवा दी जाती है । साथ ही आपको संपूर्ण आहार विहार (Diet Chart) की जानकारी दी जाती है जिससे आपके खान पान आपके आहार को भी आपकी औषधि बनाया जा सके जिसके कारण आपको शत प्रतिशत और शीघ्र आराम मिलता है ।


होम्योपैथी (Homeopathy) , आयुर्वेद (Ayurved) और नेचुरोपैथी  (Naturopathy) के इस अद्भुत मिश्रण और एकीकृत उपचार (Integrated Treatment) से आपको मिलेगी हमारे परामर्श से शत प्रतिशत आराम जहाँ हम आपको एक ही उपचार (Consultation) में संपूर्ण भारत में सस्ती से सस्ती होमियोपैथिक(Homeopathic) और आयुर्वेदिक (Ayurvedic) औषधियाँ उपलब्ध करवायेंगे और आपको आयुर्वेद अथवा नेचुरोपैथी द्वारा संपूर्ण आहार विहार और खान पान (Diet Chart) की जानकारी भी देंगे ताकि आपके खाने को भी आपकी औषधि बनाया जा सके ,जिससे आपको 15 दिनों में  ही आपकी सालों साल पुरानी बीमारी में आराम लगने लगेगा । हम संपूर्ण भारत में Online परामर्श देते हैं।





क्यूँ होती है हमे कब्ज़ियत (Constipation) ? क्या है कब्ज होने का कारण आयुर्वेद में ? इसे गहराई से समझने के लिए हमारा यह Blog अवश्य पड़ें ।


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