क्या है Paralysis (लकवा) होने का कारण ? क्या है Paralysis का सही उपचार ?
अगर आप Paralysis के रोगी हैं ,आपको Facial Paralysis यानी चेहरे पे लकवा हुआ है या आपको पूरे शरीर में या शरीर के दाहिनी और या बाहिनी ओर या फिर किसी विशेष अंग में लकवा हो चुका है तो इस लेख को अंत तक अवश्य पड़ें और आज ही हमसे परामर्श लें ।
हमारे शरीर में लकवा होने का एक मात्र मुख्य कारण हैं हमारा गलत खान पान । हमारे गलत खान पान के कारण जब हमारे शरीर में blockage होती है और विशेष करके जब हमारे दिमाग में Clot या कचरा जमा हो जाता है तब हमारे शरीर का रक्त चाप यानी Blood Pressure बढ़ता है । जब यह बड़ते Blood Pressure की समस्या का उपचार नहीं होता , ना ही व्यक्ति अपने ख़ान पान में कोई बदलाव करता है , वह Refined तेल , माँसाहार , भैंस का दूध जैसे पदार्थ जो शरीर में ब्लॉकेज और clot जमाने में सक्षम होते हैं और आसानी से हजम नहीं होते ,उनका सेवन करते चला जाता है , वह अपनी जीवनशैली में भी और अपने अन्य ख़ान पान में भी ग़लतियाँ करता चला जाता है , तब एक समय के बाद उस व्यक्ति के शरीर में Brain Stroke आता है और उसे लकवा यानी Paralysis हो जाता है । यहाँ समझने की बात यह है कि शरीर में लकवा होने का मूल कारण केवल हमारे ख़ान पान से हैं । अगर लकवा होने के बाद भी आप अपने ख़ान पान में कोई बदलाव नहीं करेंगे और अपने बीमारी के कारण को बंद ही नहीं करेंगे तो तरह तरह के उपचार कराने और औषधियाँ सेवन करने का कोई लाभ नहीं होगा ।
हमसे परामर्श लेने वाले अमूमन लोगों का यही कहना होता है कि हमने इतनी जगह से दवाई खाई इतना पैसा खर्च किया इतना समय का कोर्स किया पर हमारी यह समस्यायें ठीक ही नहीं हुई। उसका कारण यह है की आज कल के जो वैद्य और डॉक्टर हैं वह रोगी को ठीक करने के मक्सत से नहीं बल्कि अपनी औषधि बेचने के मकसत से इलाज करते हैं। कुछ बनी बनाई औषधियाँ तैयार करके रख लेना और हर व्यक्ति को अपनी दवा बेच के अपना कोर्स पूर्ण कराना और उसके बाद कोई परिणाम ना मिलने पर वह रोगी निराश हो जाता है और किसी भी तरह के उपचार को कराने से हिचकिचाता है ।
दूसरा paralysis (लकवा) जैसी समस्या जो मुख्यतः गलत खान पान और जीवनशैली से होने वाला रोग है अगर आप उस व्यक्ति को सहीं आहार - विहार और खान पान की जानकारी ही नहीं देंगे ,अगर आप बीमारी के मूल कारण को ही नहीं बंद करेंगे और केवल अपनी औषधि बेचने की कोशिश करेंगे तो उसे उसकी बीमारी में लाभ कैसे होगा। और दूसरी और दुर्भाग्य से कुछ लोग diet chart (आहार - विहार) की जानकारी तो देते हैं पर आयुर्वेद में वैद्यों के द्वारा खान पान पे कोई ख़ास शोध और अध्यन ना होने के कारण वह गलत और विपरीत जानकारी देते हैं ।
आप खुद ही सोचिए क्या इस दुनिया में हर व्यक्ति एक जैसा है? जवाब है नहीं । हर व्यक्ति इस दुनिया में अलग है उसके शरीर की बनावट अलग है वह किस जल वायु में रहता है उसकी जीवनशैली भी अलग है और उसके शरीर में बीमारी होने के कारण भी अलग अलग है ,किसी व्यक्ति को गरम खान पान और औषधियों से उसकी समस्या बड जाती है उसके शरीर की गर्मी बड जाती है और किसी को ठंडी से तकलीफ होती है । तो हर व्यक्ति को एक ही दवा कैसे काम कर सकती है। अगर एक ही दवा सबके लिए काम करती तो इस दुनिया में डॉक्टर्स की आवश्यकता ही ना होती ।
तीसरा जो लोगों को समझ में नहीं आता वो यह कि हमे बीमारी के कारण को बंद करना अत्यंत आवश्यक है । इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं । सोचिए आप अपने घर से बाहर निकले और आपसे गलती से आपके घर के पानी का जो नलका है वह खुला रह गया । जब आप घर वापिस आए तो आपने देखा कि पूरे घर में पानी भर चुका है और पानी का नलका भी चल रहा है । कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति इस परिस्थिति को देख कर सबसे पहले क्या करेगा । क्या वह पोचा और viper लेके पानी निकालना शुरू कर देगा या पहले पानी के नलके को बंद करेगा जिससे और पानी ना जमा हो । तो आप कहेंगे कि पहले पानी के नलके को ही बंद करेगा वरना जितना भी हम मेहनत करेंगे जितना मर्ज़ी पोछा मार लेंगे पानी कुछ समय बाद फिर दुबारा भर जाएगा । तो यह बुद्धिमत्ता आपकी तब कहाँ जाती है जब आपके शरीर की बात आती है । क्योंकि यह जो पानी का चलता हुआ नलका है यह आपके बीमारी का कारण है यानी आपका गलत ख़ान पान और जो पोछा है वह है आपकी औषधि । अब आप दुनिया का महँगा से महँगा पोछा खरीद लीजिए बड़ी से बड़ी technology ले आइए पर आपको कोई लाभ नहीं होगा और आपकी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी यानी कहने का अभिप्राय यह है कि आप बड़े से बड़े doctor और hospital से इलाज करा लीजिए , महँगी से महँगी दवा खा लीजिए , आपकी समस्या ठीक ही नहीं होगी क्योंकि आप पानी का नल्का नहीं बंद करना चाहते । हो सकता है कुछ समय के लिए किसी औषधि से आराम हो जाये पर यह समस्या फिर दुबारा हो जाएगी यानी थोड़े समय बाद पानी फिर दुबारा भर जाएगा क्योंकि आपने पानी का नल्का यानी बीमारी का कारण ही नहीं बंद किया । यह उदाहरण उन लोगों के लिए भी है जो कहते हैं कि जी हम ख़ान पान नहीं बदल सकते , सिर्फ़ दवाई देदो उसी से ठीक हो जायें। तो हमारी सलाह यही रहेगी कि आप अन्य जगाओ पे अपनी मेहनत का पैसा बर्बाद करने की तरह यहाँ ना करें । या तो आप अपने शरीर और अपने रोग को ऐसे ही स्वीकार कर लें या कुछ नये नये दवाई और औषधियाँ try करते रहे क्योंकि परिणाम कुछ नहीं मिलना और हमे भी लोगों को लूटने और व्यापार करने की इच्छा नहीं हैं । हमारा उद्देश्य है उस व्यक्ति की बीमारी को जड़ से ख़त्म करना और उसे लाभ देना ना की अपनी दवा बेचना ।
इसलिए हीलिंग रूट्स (healin roots) पर हम पूर्णतः पारंपरिक और शास्त्रोक्त पद्धति से चिकित्सा करते हैं जिसमे हम पहले आपसे एक ऑनलाइन पंजीकरण पत्र (online registration form) भरवा के आपके बीमारी के कारण को समझते हैं ,इस पंजीकरण पत्र में आपके शरीर और आपकी जीवनशैली से जुड़ी कुछ जानकारी माँगी गई होती है और फिर आपके पत्र के आधार पर आपके बीमारी के कारण और आपके शरीर की प्रकृति को देख कर अलग से औषधि बनाई जाती है जिसमे एक दिन का समय लगता है और तीन चार दिन में आपके घर पूरे भारत में औषधि भिजवा दी जाती है । साथ ही आपको संपूर्ण आहार विहार (diet chart) की जानकारी दी जाती है जिससे आपके खान पान आपके आहार को भी आपकी औषधि बनाया जा सके जिसके कारण आपको शत प्रतिशत और शीघ्र आराम मिलता है ।
होम्योपैथी (Homeopathy) , आयुर्वेद (Ayurved) और नेचुरोपैथी (Naturopathy) के इस अद्भुत मिश्रण और एकीकृत उपचार (Integrated Treatment) से आपको मिलेगी 15 दिन में ही हमारे परामर्श से शत प्रतिशत आराम जहाँ हम आपको एक ही उपचार (Consultation) में संपूर्ण भारत में सस्ती से सस्ती होमियोपैथिक और आयुर्वेदिक औषधियाँ उपलब्ध करवायेंगे और आपको आयुर्वेद अथवा नेचुरोपैथी द्वारा संपूर्ण आहार विहार और खान पान (Diet Chart) की जानकारी भी देंगे ताकि आपके खाने को भी आपकी औषधि बनाया जा सके ,जिससे आपको शीघ्र ही आपकी सालों साल पुरानी बीमारी में आराम लगेगा। हम संपूर्ण भारत में Online परामर्श देते हैं। हमारे पास बीमारी का निदान (Diagnosis) मुफ्त में किया जाता है जिसके लिये हम आपसे एक पंजीकरण पत्र भरवाते हैं जोकि पूर्णतः निःशुल्क है ।
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